अल्ट्रा मेगा सोलर पावर प्लांट स्थापना के प्रति राज्य सरकार का रवैया दुर्भाग्यपूर्ण
Posted on      Sep 08, 2014   

कल केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री श्री पीयूष गोयल ने कहा है कि राजस्थान सरकार द्वारा जमीन उपलब्ध करवाने में हो रही देरी के कारण सांभर/जयपुर में लगने वाले ‘अल्ट्रा मेगा सोलर पावर प्लान्ट‘ (क्षमता-4000 मेगावाट) का काम आरम्भ नहीं हो पा रहा है। श्री गोयल ने यह भी कहा है कि राजस्थान में जबरदस्त बिजली चोरी हो रही है।

सांभर में लगने वाले विश्व के सबसे बड़े ‘अल्ट्रा मेगा सोलर पावर प्लान्ट‘ को स्थापित करने की सैद्धान्तिक सहमति पूर्व कांग्रेस के समय दी गई थी तथा 29 जनवरी, 2014 को यू.पी.ए. सरकार के अक्षय ऊर्जा मंत्री श्री फारूक अब्दुल्ला व भारी उद्योग मंत्री श्री प्रफुल्ल पटेल की उपस्थिति में इस प्लान्ट की स्थापना के लिए छः कम्पनियों के मध्य एम.ओ.यू. भी हो गया था।

वसुन्धरा सरकार के ऊर्जा उत्पादन सम्बन्धी नकारात्मक प्रवृति के अतीत को देखते हुए इस मेगा प्लान्ट के प्रति उनके रवैये से आश्चर्य नहीं होता है। पूर्व भाजपा सरकार (2003-2008 के समय में) द्वारा भी बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने में कोई रूचि नहीं ली गई थी। जबकि 1998-2003 के कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में देश में किसी अन्य राज्य के मुकाबले सबसे ज्यादा 1750 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया गया था। यही नहीं 2008-2013 के कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भी ऊर्जा की अधिष्ठापित क्षमता में 7223 मेगावाट की बढ़ोतरी हुई तथा 10 हजार करोड़ रूपये के निवेश से सोलर ऊर्जा के 1293 मेगावाट क्षमता के प्लान्ट स्वीकृत होने के बाद 610 मेगावाट का उत्पादन भी होने लगा था। इसके अलावा भड़ला (जोधपुर) में 3000 मेगावाट क्षमता के विश्व के सबसे बडे़ सौर ऊर्जा पार्क की स्थापना का काम भी शुरू हो चुका था।

मुख्यमंत्री ने विधानसभा चुनाव से पूर्व 24 घंटे बिजली देने का वादा कर जनता को भ्रमित कर सरकार तो बना ली लेकिन 9 माह के बाद भी इस वादे को पूरा करने के प्रति वो गम्भीर नहीं दिखाई दे रही है।

एक तरफ तो मुख्यमंत्री ने बजट में अगले 5 वर्षों में सौर ऊर्जा से 25 हजार मेगावाट बिजली पैदा करने की योजना बनाने की बात की थी, वहीं दूसरी ओर इस मेगा प्लान्ट को जमीन उपलब्ध कराने में देरी कर रही हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। यही नहीं मुख्यमंत्री अपनी इस घोषणा के प्रति बिल्कुल भी गंभीर नहीं है। पूर्व कांग्रेस सरकार द्वारा जारी सौर ऊर्जा नीति-2011 के शानदार परिणाम आने के बावजूद भाजपा सरकार इसके बदले नई नीति लाने जा रही है। मीडिया में आये समाचारों के अनुसार इस प्रस्तावित नीति में निवेशकों को डी.एल.सी. रेट से जमीन उपलब्ध करवाने का प्रावधान होने वाला है, जबकि सौर ऊर्जा नीति-2011 में निवेशकों को डी.एल.सी. रेट के 10 प्रतिशत पर जमीन उपलब्ध करवाने का प्रावधान था। यदि नया प्रावधान लागू हो गया तो यह तय है कि निवेशकों की रूचि घटेगी तथा मुख्यमंत्री की 25 हजार मेगावाट की योजना सिर्फ योजना ही रह जायेगी।

पूर्व भाजपा सरकार (2003-2008) के समय भी पूर्व कांग्रेस सरकार (1998-2003) की सफल पवन ऊर्जा नीति को बदला गया था लेकिन निवेशकों के घटते रूझान के कारण तत्कालीन भाजपा सरकार को मजबूरन पूर्व कांग्रेस सरकार की नीति को ही पुनः लागू करना पड़ा था।

ऊर्जा विकास की कुंजी है, इसकी कमी से किसी भी राज्य के विकास की गति ठप्प पड़ जाती है। मुख्यमंत्री को केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री श्री गोयल की बातों पर गौर करते हुए राजस्थान की जनता के हित में इस मेगा प्लान्ट को अविलम्ब ही जमीन उपलब्ध कराने का काम करना चाहिए।


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शराबबंदी को लेकर अनशनकारी छाबड़ा का स्वास्थ्य चिंता का विषय, मुख्यमंत्री हस्तक्षेप कर पूर्व में किये समझौते को लागू करे
Posted on      Apr 22, 2014   

छाबड़ा जी ने हमारी सरकार थी तब भी उन्होंने अनशन किये थे। और हमने सोच समझ कर कमेटी बनाई जिसमें पक्ष-विपक्ष के लोग भी थे और कमेटी ने जो निर्णय किया उसके आधार पर एग्रीमेंट हुआ तो मेरा मानना है कि आज मैंने बातचीत की आपसे इनकी मैन ग्रिवेंसेज यही है कि कमेटी बनने के बाद जो समझौता हुआ सरकार से उससे नई सरकार बदल गई है इस बात को लेकर ज्यादा उनके दिमाग के अंदर आक्रोश है। मेरा मानना है कि जो समझौता हुआ था उसको पूर्णतया लागू करना चाहिए, जिससे कि पूर्ण रूप से शराबबंदी नहीं भी हो पा रही थी, ये हमने भी अपनी मजबूरी बताई थी तो कम से कम समझौते के आधार पर अंकुश लग सकता है जो शराब पीकर आप देखते हैं क्या-क्या घटनाएं होती हैं, जो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण होती हैं, हत्या तक हो जाती है, और बलात्कार होते हैं, कई बाते होती हैं। तो समझौते में वो बात भी थी। नेशनल हाईवेज हैं, स्टेट हाईवेज हैं, वहां डेढ़ सौ मीटर जगह छोड़कर शराब की दुकान खुल जाये, वो समझौते के अंदर बात थी। तो जिस प्रकार समझौता किया गया था, जिसके आधार पर शराबबंदी सम्पूर्ण नहीं भी हो तो कम से कम अंकुश लग जाये। नम्बर तीन कि शहरों के अंदर नगरपालिका के वार्ड हैं वहां के लोग या गांवों में जो ग्राम पंचायते हैं वहां के लोग अगर लिखकर दे सरकार को कि हम शराब की दुकान नहीं चाहते हैं तो शराब की दुकान नहीं चाहने अगर वो मंशा जाहिर करें तो उसकी प्रक्रिया बना दी गई थी उस प्रक्रिया के अन्तर्गत उनको दुकान बंद करनी पड़ेगी। तो बड़े अच्छे ढंग से किया गया था, 20 परसेंट लोग मांग करेंगे फिर वोटिंग होगा गांव का या वार्ड का 50 परसेंट लोग मौजूद रहने जरूरी हैं और बहुमत से फैसला होगा। कम से कम कुछ कदम ऐसे थे जिससे कि शराबबंदी सम्पूर्ण नहीं भी हो, अंकुश लग सकता था। हमने कहा अगर सड़कों पर शराब पीकर, पब्लिक प्लेसेज पर उधम मचायेगा कोई आदमी, बदतमीजी करेगा तो 50 रुपये फाईन था उसका। हमने 50 का 500 कर दिया फिर 1000, 5000 फिर 10,000 तो एक अंकुश लगता और भय रहता उसके दिमाग के अंदर, वो भी खत्म कर दिया। तो ये समझौता जो किया गया था हमारे वक्त में, मैं आज भी कहना चाहूंगा कि वो सम्पूर्ण रूप से लागू होना चाहिए, जिससे कि पब्लिक में एक संदेश जायेगा, सरकार के बारे में संदेश जायेगा तो बुरा नहीं जायेगा और इसको मैं नहीं समझता कि जब इन्होंने वार्निंग दी वापस सरकार को कि आपने ये समझौता तोड़ क्यों दिया है तो इनसे बात करनी चाहिए थी। सरकार के किसी नुमाईंदे ने इनसे बात नहीं की। इसमें कोई अहम् या घमंड आने की बात नहीं होनी चाहिए। बुलाकर बात करते तो मैं समझता हूं ज्यादा बेहतर होता, हो सकता है ये नौबत ही नहीं आती। तो अब भी मैं चाहूंगा कि डायलॉग होकर रास्ता निकले और इनका अनशन समाप्त हो 21 दिन तो हो गये हैं, मैं चाहूंगा कि सरकार को हस्तक्षेप करके बल्कि चीफ मिनिस्टर महोदया को खुद को हस्तक्षेप करके इस इश्यू को हल करवाना चाहिए। मेरा मानना है।

मैंने कहा ना कि सरकार की मजबूरी भी है कि सम्पूर्ण शराबबंदी नहीं हो पा रही है नम्बर एक। नम्बर दो अनुभव भी है राजस्थान के अंदर भी पहले प्रयोग हुआ था, बंशीलाल जी मुख्यमंत्री थे हरियाणा के, हरियाणा सरकार ने भी कोई 8-10 साल पहले प्रयोग किया था तो वो प्रयोग कामयाब नहीं हो पाया। इसलिए मैंने कहा हमने जो एग्रीमेंट किया इनके साथ, उस एग्रीमेंट में कम से कम वो तमाम बाते हैं जिससे कि आम जनता को लगे कि हम नहीं चाहते तब भी शराब की दुकान हमारे मौहल्ले में खुल गई है। झगड़े हो रहे हैं, शराब पीकर उत्पात मचा रहे हैं इसलिए हमारी गवर्नमेंट जब बनी थी तो हमने पहला काम ये किया कि रात को आठ बजे के बाद कोई शराब की दुकान नहीं खुली रहेगी। उस एक फैसले का इतना बड़ा इम्पैक्ट पड़ा कि मैं समझता हूं पूरे राजस्थान में एक चर्चा का विषय बन गया था, क्योंकि शराब पीकर आदमी रात को 12-1 बजे जाता है घर पर, क्या-क्या नहीं होता, आप जानते हो। तो ये जो अच्छे कदम उठाये गये थे सरकार के एग्रीमेंट तक किया गया तब भी उसको इस सरकार ने बदल दिया। किन कारणों से बदला, समझ के बाहर है।

अब एक लाख एप्लीकेशन अभी आई हैं शराब की दुकानें खोलने के लिए जो सरकार ने नई नीति बनाई। 600 करोड़ इकट्ठे तो कर लिये, किनसे किये, जो लोग बेकार-बेरोजगार है। आज 36 कौम के लोगों ने एप्लीकेशन लगाई पैसा कमाने के लिए कि उनको रोजगार मिल जाये। एक लाख से अधिक एप्लीकेशन आई थी आपने देखा होगा, अखबारों में भी आया। और 600 करोड़ रुपये इकट्ठे हेा गये तो मैं समझता हूं कि ऐसा पैसा किस काम का। पैसा लौटाना चाहिए मेरा मतलब है। अगर मान लीजिए ये कोई लॉटरी तो है नहीं, उनकी मजबूरी में उन्होंने एप्लीकेशन लगाई थी आप उनको शराब की दुकान नहीं दे पाये। लॉटरी खुली उनके नाम की नहीं खुली तो पैसा लेकर क्यों बैठे हो उन लोगों का। एक तरफ तो आप कहते हो बेरोजगार का हम ध्यान रखेंगे। तो ये तमाम बातें सरकार को गंभीरता से सोचनी चाहिए।

मैं 5-6 बार मिल चुका हैं इनसे जब हमारे वक्त में अनशन किये थे। ये बीजेपी के कैडर के आदमी हैं, ये आरएसएस, बीजेपी, विश्व हिन्दु परिषद् उनके कैडर के आदमी हैं। मैं इनको जानता ही नहीं था पर जब इन्होंने अनशन किया तो मैं खुद 5-6 बार आकर मिला इनसे। तो वसुंधरा जी को तो मैं समझता हूं, वो हैं, बल्कि उनके मंत्रिमण्डल के साथी हैं उन सबको टाईमली बातचीत करके रास्ता निकालना चाहिए था, मेरे हिसाब से तो। और ये नौबत आनी नहीं चाहिए थी कि ये अनशन पर बैठते। मैंने जब सुना कि अनशन पर बैठेंगे तो मैंने इनको रिक्वेशट की थी कि आपको अनशन पर बैठना नहीं चाहिए बल्कि सरकार से बातचीत करनी चाहिए। अनशन पर बैठने के पहले मैंने कहा, आज मैं यह कहकर आया हूं कि रास्ता खुला रखो, आपके स्वास्थ्य की हमें चिंता है और अनशन समाप्त होना चाहिए। तो मेरा मानना है कि वसुंधरा जी को चाहिए कि इसमें कोई ईगो की बात नहीं है। पब्लिक इंटरेस्ट की बात के लिए ही आगे वाला अनशन कर रहा है तो उसके लिए उनको आगे आकर कोई रास्ता निकालना चाहिए।

(अशोक गहलोत)


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होनहार लिखेंगे सूचना क्रान्ति की नई इबारत
Posted on      Jul 26, 2013   

राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता के साथ ही विद्यार्थियों को प्रतिस्पर्धा के इस दौर में देश और दुनिया की जानकारी देने तथा उनके ज्ञान में अभिवृद्धि के उद्देश्य से राज्य सरकार ने अनेक योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षित राजस्थान के सपने को पूरा करने की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाये हैं। हमारी योजनाओं को मूर्तरूप देने के कार्य में जनसहभागिता बढ़ाने के उद्देश्य से ही हर कार्यक्रम को जिले के प्रभारी मंत्री, विधायक, सांसद की उपस्थिति में समारोहपूर्वक मनाने की एक नई परम्परा की शुरूआत की गई जिससे योजनाओं के प्रति जन जुड़ाव बढ़ा है।



25 से 29 जुलाई, 2013 तक एक बार फिर ऎसा ही एक जनउत्सव मनाया जा रहा है। यहां हर जिले में होनहार विद्यार्थियों को राजीव गांधी विद्यार्थी डिजिटल योजना के तहत लैपटॉप तथा सभी राजकीय विद्यालयों की नवीं कक्षा में प्रवेश लेने वाली बालिकाओं को साईकिल खरीदने के लिए चैक वितरण करने के कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। इसका उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ हमारे विद्यार्थियों को उनकी प्रतिभा के अनुरूप प्रोत्साहन एवं पुरस्कार देना है ताकि वे प्रतिस्पर्धा के इस युग में अपने आप को अपडेट रखते हुए आगे बढ़ सकें।

सूचना प्रौद्योगिकी के दूरगामी परिणामों को देखते हुए ही पूर्व प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी ने देश को 21वीं सदी में ले जाने का जो सपना देखा था वह आज फलीभूत हो रहा है। वे चाहते थे कि सूचना क्रान्ति के जरिये भारत दुनिया का अग्रणी देश बने तथा हम पूरी तैयारी के साथ 21वीं सदी में प्रवेश करें ताकि किसी से भी पीछे नहीं रहें। स्वर्गीय गांधी की दूरदर्शिता से ही देश में सूचना क्रान्ति की नींव रखी गई और आज उस पर विकास का एक मजबूत भवन खड़ा है जो हमें आगे बढ़ने की निरन्तर प्रेरणा देता है।

मेरा सपना है कि राजस्थान सम्पूर्ण साक्षर और शिक्षित बनने के साथ ही देश और दुनिया में आ रहे बदलावों को अपना सके। इसके लिये सूचना प्रौद्योगिकी का महत्त्व सर्वविदित है। इसी सोच के साथ यहां हमने सरकार के सभी विभागों को आई.टी. के प्रयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बजट में तीन प्रतिशत राशि का प्रावधान किया। विद्यार्थी जीवन से ही हमारे छात्र-छात्राएं सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़ सकें, इसी सोच के साथ राजीव गांधी विद्यार्थी डिजिटल योजना का शुभारम्भ किया गया ।



मुझे खुशी है कि गत वर्ष 20 अक्टूबर,2012 को यूपीए की चेयरपर्सन श्रीमती सोनिया गांधी एवं प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने दूदू (जयपुर) में प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को लैपटॉप देकर इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरूआत की थी। यह एक स्वर्णिम क्षण था जब लैपटॉप पाने वाले विद्यार्थियों को देश की दो विभूतियों के हाथों लैपटॉप पाकर गर्व का अहसास हुआ था। इसके बाद 14 मई, 2013 को समारोहपूर्वक पूरे राज्य में समस्त राजकीय विद्यालयों में आठवीं कक्षा में दूसरे से ग्यारहवें स्थान प्राप्त करने वाले 3.50 लाख छात्र-छात्राओं को टैबलेट-पीसी के लिये 6-6 हजार रुपये के चैक वितरित किये गये। प्रदेश के 35 हजार 819 विद्यालयों में एक साथ आयोजित समारोह में चैक वितरित किये गये जो अपने आप में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम था।

योजना के तीसरे चरण में 25 से 29 जुलाई तक प्रतिभावान विद्यार्थियों को लगभग 19 हजार रुपये की कीमत वाले 14 इंच के लैपटॉप वितरित किये जायेंगे। मैंने वर्ष 11-12 एवं 12-13 के समस्त राजकीय विद्यालयों के 8वीं कक्षा में प्रथम आने वाले तथा कक्षा 10वीं व 12वीं की माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान की परीक्षा में मैरिट में आने वाले प्रथम 10-10 हजार विद्यार्थियों को लैपटॉप देने की घोषणा की थी। इससे गत एवं वर्तमान सत्र के लगभग 1.11 लाख विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा । इसके अलावा उच्च शिक्षा के क्षेत्र में राजकीय विश्वविद्यालयों के सभी संकायों में प्रथम आने वाले एक हजार प्रतिभावान विद्यार्थियों को भी 14 इंच के लैपटॉप दिये जायेंगे।

मेरे लिये प्रतिभा का सम्मान एक गौरव की अनुभूति है। इससे हम अपने आने वाले कल को सुरक्षित बना रहे हैं। हमारे इस प्रयास से विद्यार्थियों में, भविष्य में प्रतिस्पर्धा भी पैदा होगी एवं जीवन में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से उन्हें आगे बढ़ने के सुनहरे अवसर मिलेंगे तथा देश-प्रदेश में मानव संसाधन में वृद्धि होंगी। साथ ही इन विद्यार्थियों को राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर हो रहे नवाचारों, सूचनाओं तथा अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध होंगी।



मुझे खुशी है कि इस विकास उत्सव के अवसर पर हम दस जुलाई, 2013 तक समस्त राजकीय विद्यालयों की कक्षा 9 में प्रवेश लेने वाली बालिकाएं जिनमें वर्ष 2012-13 की शेष 1.62 लाख बालिकाएं भी शामिल हैं, को साईकिल वितरण योजना के तहत 2500 रुपये (प्रत्येक बालिका) का चैक वितरित किया जायेगा। इसके अलावा 10 जुलाई के बाद प्रवेश लेने वाली बालिकाओं को भी बाद में साईकिल क्रय करने के लिये चैक दिया जायेगा।

मैं प्रदेशवासियों, समस्त जनप्रतिनिधियों, सेवाभावी संगठनों तथा शिक्षा से जुड़े गुणीजनों से अपील करता हूं कि वे इस योजना का महत्व विद्यार्थियों तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार के सहभागी बनें ताकि हमारे आने वाले कल के नागरिक पूर्ण शिक्षित एवं सशक्त बन कर देश के विकास में योगदान दे सकें।

(अशोक गहलोत)


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सबको मिले पक्की छत का अधिकार
Posted on      Jun 19, 2013   

आम आदमी के जीवन में तीन मूलभूत ज़रूरतें – रोटी, कपड़ा और मकान हासिल करने के लिए जीवन भर संघर्ष करना पड़ता है। इनमें रोटी और कपड़ा की व्यवस्था तो हो जाती है, लेकिन मकान का सपना पूरा करने में सारी उम्र निकल जाती है। मेरा यह सपना है कि हर गरीब को पक्की छत का आसरा मिले जिसके नीचे वह गर्व और आत्मसम्मान से जीवन बिता सके।

इसी सोच के साथ राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना एवं मुख्यमंत्री शहरी बीपीएल आवास योजना का क्रियान्वयन सुनिश्चित किया है। ग्रामीण क्षेत्र में इंदिरा आवास को मिलाकर तीन वर्षों में दस लाख मकान बनाने एवं शहरी बीपीएल आवास योजना के तहत प्रतिवर्ष एक लाख मकान बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

ग्रामीण बीपीएल आवास योजना के तहत अब तक 7.17 लाख आवासों की मंजूरी के साथ ही 1.84 लाख आवासों का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया है। सभी ग्रामीण बीपीएल परिवारों को आवास मिले इसके लिए मैंने प्रदेश में 20 जून से 20 जुलाई, 2013 तक विशेष अभियान चलाकर स्वीकृतियां जारी करने के निर्देश दिए हैं। इस अभियान के दौरान 3 लाख 54 हजार नये आवासों की स्वीकृतियां जारी की जायेंगी, जिसमें 2 लाख स्वीकृतियां मुख्यमंत्री बीपीएल आवास योजना की, 85 हजार 460 इंदिरा आवास योजना, विशेषकर वंचित समूह के लिए 43 हजार 131 एवं वन अधिकार समूह के अन्तर्गत 25 हजार 447 आवास निर्माण की स्वीकृतियां विशेष अभियान के दौरान जारी की जायेंगी।

आज राजस्थान में 38.83 लाख बीपीएल, स्टेट बीपीएल एवं अन्य श्रेणियों के परिवारों को 2 रुपये के बजाय 1 रुपये किलो गेहूं मिलने से उनके सामने रोटी का संकट नहीं है। देश- प्रदेश में महात्मा गाँधी नरेगा योजना से ग्रामीणजन को मिल रहे 100 दिन के रोज़गार की गारंटी (राजस्थान में 150 दिन) से उनकी क्रय शक्ति बढ़ी है इससे उनकी तन ढकने के लिए कपड़े एवं अन्य आवश्यकताएं भी पूरी हो रही है लेकिन फिर भी घर का सपना अभी भी अधूरा ही रह जाता है।

यह एक बड़ी सच्चाई है कि मकान के लिए कर्ज लेकर भी कई बार पूंजी कम पड़ जाती है और उस कर्ज को चुकाना भी एक चुनौती बना रहता है। लाखों लोग जिनमें खासकर गरीबी की रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले निर्धनतम लोगों के जीवन में तो अपने घर का सपना पूरा करना सचमुच एक असंभव काम ही होता है। बीपीएल परिवारों को तो इंदिरा आवास योजना से ही अपने घर की उम्मीद थी पर उसकी प्रतीक्षा सूची इतनी लंबी थी कि उसे पूरा होने में ही करीब बीस साल लग जाते। इतने समय में घर में एक नई पीढ़ी तैयार हो जाती है।

मुझे गर्व है कि राजस्थान देश का पहला राज्य है जिसने गरीब को अपना घर का सपना पूरा करने का संकल्प लिया और उसे फलीभूत करने के लिए हुडको से 3400 करोड रुपये का ऋण लेने का ऎतिहासिक निर्णय कर इस काम को सफलतार्पूवक आगे बढ़ाया है। मुख्यमंत्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना के जरिये हमने उस गरीब को घर का मालिक बनाया जिसकी घास फूंस की झोंपड़ी गर्मी में आग लगने से जल जाती है तो आंधी में उसके कच्चे मकान के टीन-टप्पर उड़ जाते हैं और बरसात में पानी टपकने से परिवार के साथ जीवन दूभर हो जाता है।

उस गरीब की पीड़ा को मैं हमेशा महसूस करता रहा हूं और इसी सोच के साथ मुख्यमंत्री बीपीएल ग्रामीण आवास योजना के तहत राज्य में तीन साल में इंदिरा आवास मिलाकर दस लाख मकान बनाने का लक्ष्य तय किया ताकि कोई भी गरीब पक्की छत से वंचित नहीं रहे। घर बनाने के लिए प्रति बीपीएल परिवार को 70 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है। जिसे राज्य सरकार वहन करेगी और गरीब की जेब से एक पैसा भी नहीं लगेगा। इसके साथ ही मकान में शौचालय बनाने के लिए अलग से 9100 रुपये की सहायता भी दी जा रही है।

गांवों के समान अब शहरी बीपीएल गरीबों के लिए भी हर साल एक लाख मकान बनाकर हम पांच साल में शहरी गरीब के मकान का सपना भी पूरा करेंगे। इसके लिए हमने 500 करोड़ रूपये के बजट का प्रावधान किया है। शहरी आवास योजना में 1.1 लाख आवासों की प्रशासनिक एवं 51 हजार आवासों की वित्तीय स्वीकृति जारी की जा चुकी है। शहरी क्षेत्र में मकान बनाने के लिए शौचालय निर्माण सहित 75 हजार रूपये की राशि उपलब्ध करवाई जा रही है।

मैंने प्रधानमंत्री जी से भी आग्रह किया कि राजस्थान की इस पहल को पूरे देश में “राइट टू शेल्टर” के रूप में लागू किया जाये ताकि देश का हर गरीब अपने मकान में आत्मसम्मान के साथ चैन से सुखी जीवनयापन कर सके। मुझे खुशी है कि मेरे इस प्रस्ताव पर केन्द्र सरकार का रुख सकारात्मक है।

(अशोक गहलोत)


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मेरी भावना
Posted on      Jun 12, 2013   

उदयपुर प्रवास के दौरान मंगलवार को जब मैं महाराणा भूपाल अस्पताल परिसर में वेदान्ता-हिंदुस्तान जिंक हार्ट हॉस्पीटल के उद्घाटन समारोह में शामिल होने पहुंचा तब मैंने यह महसूस किया कि वहां उपस्थित सैकड़ों अतिथियों से रोगियों, उनके तीमारदारों तथा चिकित्सकों को असुविधा होना स्वाभाविक था। ऎसी परिस्थितियों में हमें यह समझना चाहिए कि अस्पताल की व्यवस्था में व्यवधान नहीं हो तथा वहां भर्ती रोगियों को भी आमजन की उपस्थिति से असहजता महसूस न हो।

एक समाचार पत्र ने इस पूरे वाकये के फोटो प्रकाशित किये हैं। मैं समझता हूं कि आमजन को अस्पताल में लागू आचार संहिता के बारे में जागरूक किया जाना आवश्यक है। जब कभी भी हम अस्पताल जाएं तो इस बात का पूरा ख्याल रखना चाहिए कि हमारी किसी भी गतिविधि से मरीजों एवं चिकित्साकर्मियों को अपना काम करने में परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।

हमें यह भी समझना होगा कि बाहर से आने वाले आगंतुकों से मरीजों को तथा मरीजों से आगंतुकों को किसी प्रकार का संक्रमण नहीं हो। इस दृष्टि से भी अस्पताल के किसी भी वार्ड अथवा आईसीयू में अनावश्यक रूप से लोगों को प्रवेश नहीं करना चाहिए। यह हम सभी के लिए स्वास्थ्य की दृष्टि से भी उचित होगा।

मैं आमजन एवं कार्यकर्ताओं से अपेक्षा करता हूं कि भविष्य में भी जब कभी किसी जनप्रतिनिधि का प्रदेश के किसी अस्पताल में कोई कार्यक्रम हो अथवा किसी मरीज को देखने जाना पड़े तो वे संयम बरतें तथा इस प्रकार के हालात उत्पन्न नहीं करें। मीडिया, फोटोग्राफर, सभी साथियों से भी यही अपेक्षा रहेगी। मुझे उम्मीद है कि मेरी भावना संबंधितों तक पहुंचेगी।

(अशोक गहलोत)


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देश सिद्धान्त, नीतियों एवं कार्यक्रमों से चलता है, हठधर्मिता और अहंकार से नहीं
Posted on      Jun 10, 2013   

पिछले दस सालों से केन्द्र की सत्ता हासिल करने की लालसा में छटपटा रही भारतीय जनता पार्टी ने रविवार को गोवा में सम्पन्न कार्यकारिणी की बैठक में गुजरात के मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को इलेक्शन कैम्पेन कमेटी का अध्यक्ष बनाकर जिस प्रकार का माहौल बनाने का प्रयास किया है उससे देश में कोई सकारात्मक संदेश नहीं जाने वाला।

वर्ष 2002 में गुजरात में हुए साम्प्रदायिक दंगों की टीस आज भी पूरे देश के साथ गुजरात में भी महसूस की जाती है। आज जिस प्रकार श्री अटल बिहारी वाजपेयी का नाम लेकर आगे बढ़ने की बात कही जा रही है, जबकि तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री वाजपेयी ने दंगे के बाद आहत होकर इसे मानवता पर कलंक बताते हुए साफ शब्दों में कहा कि गुजरात में राज धर्म का निर्वाह नहीं किया गया ऐसे में वे क्या मुंह लेकर दुनिया के मुल्कों में जायेंगे। आज भी लोग उसे भुला नहीं पाये हैं।

श्री नरेन्द्र मोदी ने कमेटी का अध्यक्ष बनने के बाद अहंकार में जो भाषण दिया, उनकी जो बॉडी लेंग्वेज थी और जिस प्रकार उन्होंने अपने भाषण में कांग्रेस के नेताओं और प्रधानमंत्री के बारे में भाषा का इस्तेमाल किया। ऐसा व्यक्तित्व क्या पार्टी का नेतृत्व करेगा ? उन्होंने अपने भाषण में कहा कि कांग्रेस मुक्त भारत, राजनीतिक नहीं, राष्ट्रवादी कार्यक्रम है, यह उनके अहंकार को साबित करता है। कांग्रेस अपने शानदार इतिहास के साथ देश का वर्तमान एवं भविष्य है जो हर हिन्दुस्तानी के दिल में है, उसे कोई भी षडयंत्र से हटा नहीं सकता। श्री मोदी ने इलेक्शन कैम्पेन कमेटी का अध्यक्ष बनने के बाद जो भाषण दिया उससे उनकी हठधर्मिता, अहंकार और जिद्दी स्वभाव खुलकर सामने आ गया। ऐसे व्यक्ति देश को किस दिशा में ले जायेंगे, इसकी कल्पना हर कोई कर सकता है। उनका धार्मिक उन्माद का एजेण्डा देश के लिए खतरे की घंटी है। जिस प्रकार की भाषा गोवा में बोली गई वह चिंता का विषय है।

कांग्रेस मुक्त भारत की सोच रखना ही देशवासियों की नजर में हस्यास्पद होगा, क्योंकि कांग्रेस की रग-रग में देश की आत्मा बसती है। हमारा इतिहास त्याग, बलिदान और प्रतिबद्धता का रहा है। देश की आजादी से लेकर नये भारत के निर्माण में कांग्रेस की भूमिका हर कोई जानता है। महात्मा गांधी का बलिदान, देश की प्रधानमंत्री श्रीमती इन्दिरा गांधी, श्री राजीव गांधी तथा पंजाब के मुख्यमंत्री सरदार बेअन्त सिंह सहित ज्ञात अज्ञात हजारों लोगों की शहादत की वजह से ही आजादी के 65 साल बाद भी हमारा देश एक और अखण्ड बना हुआ है।

देश की आजादी के बाद नए भारत की परिकल्पना को मूर्त रूप देने की चुनौती का सामना करते हुए कांग्रेस सरकार ने ही इस देश को विकासशील देशों की पंक्ति में खड़ा होने के योग्य बनाया।

दुष्प्रचार के माध्यम से सत्ता पाने के लिए लोगों को भ्रमित करने वाली भाजपा की चाल, चरित्र एवं चेहरा देश के सामने आ चुका है। राम मन्दिर, गौ माता, कॉमन सिविल कोड धारा 370 जैसे मुद्दों को लेकर आठ साल सत्ता में रहकर अपने सभी वादे भूल गयी। आज भाजपा द्वारा जिस प्रकार से प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह पर बेतुके आरोप लगाये जा रहे हैं वे दुर्भाग्यपूर्ण हैं। वे एक कुशल अर्थशास्त्री एवं गांधीवादी व्यक्तित्व के धनी हैं।

प्रधानमंत्री जैसे पाक-साफ व्यक्तित्व पर कीचड़ उछालने वाली भारतीय जनता पार्टी खुद अपने गिरेबां में झांक कर देखें कि किस प्रकार उनके पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बंगारू लक्ष्मण, पूर्व केन्द्रीय राज्य मंत्री श्री दिलीप सिंह जूदेव स्टिंग ऑपरेशन के जरिये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े गये थे जिसे सारी दुनिया ने देखा। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री श्री येदुयूरप्पा को भ्रष्टाचार की वजह से ही जेल जाना पड़ा। ऐसे में श्री मोदी का यह वक्तव्य पूरी तरह हास्यास्पद है कि भाजपा शासित राज्यों के किसी भी मुख्यमंत्री पर भ्रष्टाचार के इल्जाम नहीं लगे। राजस्थान में ही हमारी पूर्ववर्ती भाजपा सरकार की मुख्यमंत्री पर भ्रष्टाचार के आरोप तो उनकी स्वयं की पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने ही लगाए। श्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक‘ को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पद से हटाया गया।

आज हमारा देश कृषि, उद्योग, रक्षा, खाद्यान्न, परिवहन, ऊर्जा, सड़क सूचना प्रौद्योगिकी, विदेश नीति सहित हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। भाजपा की परेशानी यह है कि वह कभी भी सही और मूल मुद्दों पर बहस ही नहीं करती। भ्रष्टाचार, जातिवाद, नस्लवाद, नक्सलवाद, आतंकवाद मिटाने को लेकर कांग्रेस हमेशा ही संकल्पबद्ध रही है। पूर्व प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी ने मुम्बई के कांग्रेस अधिवेशन में पारदर्शी सुशासन देने के लिए सत्ता से दलालों पावर ब्रोकर्स को हटाने की बात कही थी, तब भाजपा एवं उनके घटक दलों ने बोफोर्स को लेकर उन पर झूठे इल्जाम लगाये।

कांग्रेस के बुराडी अधिवेशन में यूपीए की चेयरपर्सन श्रीमती सोनिया गांधी ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध अपने संकल्प को दोहराते हुए पांच (पॉइन्ट प्रोग्राम) दिये जिसके तहत :-
1 भ्रष्टाचार में लिप्त राजनीतिक नेताओं एवं ब्यूरोक्रेट्स के खिलाफ तुरन्त, कठोर एवं समयबद्ध कार्यवाही
2 चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सरकारी धन की व्यवस्था
3 सरकार के द्वारा तमाम खरीदों को पारदर्शी बनाने हेतु स्पष्ट वैधानिक प्रक्रिया
4 केन्द्र में कांग्रेस सरकार एवं कांग्रेस शासित राज्यों में मुख्यमंत्री से लेकर मंत्रियों तक के विवेकाधीन अधिकारों को समाप्त करना
5 प्राकृतिक संसाधन के दोहन के लिए एक खुली एवं प्रतिस्पर्धात्मक व्यवस्था की बात कही।

इस पर भाजपा के लोग बहस क्यों नहीं करते?

आज वह जमाना आ गया जब भ्रष्ट लोग ईमानदारों पर आरोप लगा रहे हैं। भाजपा के कई लोग एक झूठ को 100 बार बोलने से सच हो जाने के मुहावरे को पकड़े हुए हैं लेकिन झूठ पर सत्य की विजय ही होती है। लोकतंत्र में अहंकार का कोई स्थान नहीं है। देश सिद्धान्त, नीति एवं कार्यक्रम से चलता है, इस पर बहस होनी चाहिए। भाजपा के लोगों का विश्वास तो लोकतंत्र में है ही नहीं। ये तो फासिस्ट लोग हैं जो सत्ता पाने तक ही लोकतन्त्र का मुखौटा पहने हुए हैं।

मुझे विश्वास है कि देश-प्रदेश के आज के युवा एवं छात्र तथा आमजन समझदार हैं और 21वीं सदी के राजीव गांधी के सपने को साकार करने के लिए आगे आयेंगे, न की देश को कमजोर करने वाले नारे के बहकावे में आयेंगे।

(अशोक गहलोत)


देश सिद्धान्त, नीतियों एवं कार्यक्रमों से चलता है, हठधर्मिता और अहंकार से नहीं| 7 Comments


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आई.ए.एस. परीक्षा में राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर
Posted on      May 29, 2013   

आज सवेरे दैनिक भास्कर समाचार पत्र में एक अच्छी खबर पढ़ने को मिली जिसमें यह बताया गया कि देश की सबसे बड़ी एवं प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षा आई.ए.एस. के लिए वर्ष 2012 की परीक्षा में प्रदेश के 20 युवाओं का चयन हुआ। इस प्रतियोगी परीक्षा में राजस्थान देश में दूसरे नम्बर पर रहा जिससे प्रदेश का नाम रोशन हुआ है। हम सभी के लिए भी यह गर्व की बात है कि आज हमारे युवाओं में अपने लक्ष्य को पाने की इच्छाशक्ति बढ़ी है। यह प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का ही परिणाम है कि हमारे युवा पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

इस खबर में यह भी बताया गया कि वर्ष 2008 में राजस्थान से आई.ए.एस. की प्रतियोगी परीक्षा में सात प्रतियोगियों का चयन हुआ था और साल दर साल इसमें वृद्धि हुई और आज प्रदेश दूसरे स्थान पर आ सका है। यह सुखद बात है कि आज उत्तर भारतीय राज्यों में उत्तर प्रदेश के बाद राजस्थान में ही सर्वाधिक आई.ए.एस. बन रहे हैं। प्रदेश के युवा आज न केवल आई.ए.एस. अपितु विज्ञान, वाणिज्य, कला, तकनीक, रक्षा एवं प्रबन्धन सहित हर क्षेत्र की प्रतियोगी परीक्षाओं में अव्वल रहकर प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं। मूलतः जोधपुर की सुश्री स्तुति चारण ने आई.ए.एस. परीक्षा 2012 में देश में तीसरा स्थान हासिल कर राज्य का नाम रोशन किया। इसी प्रकार इस परीक्षा में हमारे युवाओं ने प्रशासन, पुलिस, राजस्व सहित अन्य सेवाओं के लिये योग्यता हासिल की है। मैं सभी सफल प्रतियोगियों को अपनी ओर से तथा राज्य की जनता की ओर से हार्दिक बधाई देता हूं।

राज्य में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आज हमारे देश में पहुंच (Access), गुणवत्ता (Quality), प्रासंगिकता (Relevance) तीन प्रमुख चुनौतियां हैं। हमने इन चुनौतियों को स्वीकार कर आगे बढ़ने का संकल्प लिया है। मेरी इच्छा है कि प्रदेश के युवाओं में उच्च शिक्षा के प्रति अभिरूचि उत्पन्न हो जिससे वे अपने बेहतर भविष्य के सपनों को साकार कर सकें। राज्य सरकार उच्च शिक्षा को व्यापक बनाने के लिए विशेष जोर दे रही है। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि आजादी के समय प्रदेश में एक भी विश्वविद्यालय नहीं था और सामान्य शिक्षा के केवल 7 महाविद्यालय थे। शिक्षा हर विद्यार्थी के जीवन तथा सम्पूर्ण व्यक्तित्व को बनाने का मूल मंत्र है। शिक्षा बिना जीवन में हर तरफ अंधेरा होता है। अशिक्षित व्यक्ति अन्याय, शोषण के विरूद्ध आवाज नहीं उठा पाता है। आज के युग में ज्ञान ही सबसे बड़ी ताकत है।

मुझे याद है पिछली बार (1998-2003) जब हम शासन में थे तब हमारे विद्यार्थी उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के लिए प्रदेश से दूर दक्षिणी एवं अन्य राज्यों में शिक्षा हासिल करने के लिये जाते थे। जहां उन्हें भाषा सहित अन्य मुश्किलों का सामना भी करना पड़ता था। उनके परिवार के ऊपर भी आर्थिक बोझ पड़ता था। ऐसे मानसिक तनावों के बीच हमारे विद्यार्थी घर से मीलों दूर शिक्षा हासिल कर रहे थे। मैंने उस समय उनकी एवं उनके परिवार की पीड़ा को महसूस किया था। मेरा यह संकल्प था कि हम राज्य में ही बच्चों को बेहतर उच्च शिक्षा देने की व्यवस्था करेंगे।

आज मैं गर्व से कह सकता हूं कि राजस्थान में देश के प्रतिष्ठित अन्य शिक्षण संस्थान खुलते जा रहे है। जिनमें IIT, AIIMS, National Law University, NIFT (Jodhpur), IIM (Udaipur) और किशनगढ़ में सेंट्रल यूनिवर्सिटी शामिल है। कोटा में IIIT शीघ्र ही खुलने जा रही है। आज प्रदेश में राज्य पोषित 22 विश्वविद्यालय, निजी क्षेत्र में 33 विश्वविद्यालय, 9 डीम्ड विश्वविद्यालय सहित 1471 कॉलेज एवं शोध संस्थान हैं। पिछले साल हमने राज्य पोषित आठ नये विश्वविद्यालय खोलने का फैसला लिया था। जिनकी स्थापना का कार्य द्रुतगति से चल रहा है।

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विद्यार्थियों को समुचित प्रोत्साहन, छात्रवृत्ति तथा प्रदेश के विभिन्न संकायों में मेरिट में आने वाले स्नातक तथा स्नातकोत्तर कक्षाओं के एक हजार विद्यार्थियों को लैपटॉप उपलब्ध कराने का फैसला किया जिससे हमारे विद्यार्थी देश और दुनिया में हो रहे बदलावों को आत्मसात कर सकें तथा प्रतिस्पर्धा के इस युग में अपने आप को अपडेट रख सकें। हमारे इन्हीं प्रयासों, शिक्षा के व्यापक प्रसार के लिये बनाई गई योजनाओं, नीतियों का ही यह परिणाम है कि आज प्रदेश में स्कूली एवं उच्च शिक्षा का एक बेहतर वातावरण बना है जो हमारे बच्चों और युवाओं में आत्मविश्वास के साथ स्वच्छ प्रतिस्पर्धा की भावना जागृत कर रहा है। मुझे विश्वास है कि राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न स्तर की परीक्षाओं में अब हमारे विद्यार्थी निरन्तर सफलता हासिल करेंगे जिससे देश-प्रदेश को बेहतर मानव संसाधन हासिल हो सकेगा।

भविष्य में और अधिक IT क्रांति का लाभ नई पीढ़ी उठाए, यही सोचकर ’राजीवं गांधी विद्यार्थी डिजीटल योजना’ के तहत अभी तक समस्त राजकीय विद्यालयों की आठवीं कक्षा में दूसरे से ग्यारहवें स्थान प्राप्त करने वाले 3.50 लाख छात्र-छात्राओं को Tablet-PC के लिये 6-6 हजार रुपये के चैक वितरित किये गये। इसी प्रकार गत एवं वर्तमान सत्र के 1.11 लाख विद्यार्थियों को लैपटॉप का जुलाई से वितरण प्रारम्भ हो रहा है। इसमें 10वीं, 12वीं की बोर्ड परीक्षा की मेरिट में आने वाले प्रथम 10-10 हजार विद्यार्थियों तथा समस्त राजकीय विद्यालयों की 8वीं कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थी शामिल है।

(अशोक गहलोत)


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कांग्रेस मुल्क को तोड़ने वाली ताकतों के सामने कभी नहीं झुकेगी
Posted on      May 28, 2013   

छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में नक्सलवादियों के बर्बरतापूर्ण हमले में शहीद हुए सभी कांग्रेसी नेताओं एवं सुरक्षाकर्मियों को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। मैं छत्तीसगढ़ के कांग्रेसजनों के इस जज्बे और हिम्मत को सलाम करता हूं। एक बार फिर कांग्रेस एवं कांग्रेसजनों ने दिखाया है कि आतंकवाद, नक्सलवाद, सांप्रदायिकता, अलगाववाद जैसी मुल्क को तोड़ने वाली ताकतों के सामने न कभी हम झुके थे और न ही कभी झुकेंगे। नक्सलियों की बर्बरता एवं पाश्विकता के बावजूद हमारे इन नेताओं ने पूरे हौसले से उनका डटकर सामना किया।

हमारी पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी, स्व. राजीव गांधी, पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री सरदार बेअंत सिंह जी सहित ज्ञात-अज्ञात महान् नेताओं ने मुल्क को एक और अखंड रखने के लिए ही अपनी अमिट शहादत दी, लेकिन आतंकवाद के आगे झुके नहीं। आज पूरा देश उनके इस बलिदान को श्रद्धा से याद करता है।

छत्तीसगढ़ के हमारे कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष श्री नन्दकुमार पटेल, पूर्व मंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष श्री महेन्द्र कर्मा एवं अन्य कांग्रेसजनों का यह बलिदान उसी की एक और कड़ी है। मुल्क के लिए कुर्बान होना हमारी गौरवशाली परम्परा है। हमारे महान् नेताओं से मिली विरासत को छत्तीसगढ़ के कांग्रेसजनों ने बरकरार रखा है लेकिन विघटनकारी ताकतों से कभी समझौता नहीं किया। छत्तीसगढ़ का नक्सलवादी हमला मानवता के लिए कलंक एवं लोकतांत्रिक मूल्यों पर कड़ा प्रहार है।

मैं शहादत देने वाले सभी लोगों के परिजनों के प्रति अपनी एवं राजस्थान की जनता की ओर से हार्दिक संवेदना व्यक्त करता हूं। आज पूरा मुल्क दुख की इस घड़ी में उनके साथ खड़ा है। मैं इस हमले में घायल हमारे वरिष्ठ नेता श्री विद्याचरण शुक्ल सहित सभी घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।

(अशोक गहलोत)


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इजराइल यात्रा
Posted on      Apr 25, 2013   

आज से मैं इजराइल के प्रवास पर जा रहा हूं। यह एक ऐसा देश है जिसने अपने रेगिस्तान को नखलिस्तान में बदला है। अपनी इस राजकीय यात्रा के दौरान मेरा प्रयास रहेगा कि हम कम पानी के उपयोग से अधिक कृषि उत्पादन लेने, बागवानी, जल संरक्षण आदि क्षेत्रों में इजरायल के सफल अनुभवों एवं नवाचारों का लाभ उठाएं। राजस्थान और इजराइल की परिस्थितियां काफी मिलती-जुलती हैं। दोनों को कठिन भौगोलिक परिस्थितियां विरासत में मिली हैं। ऐसे में कठिनाइयों से जूझते हुए विकास के पथ पर कदम आगे बढाए हैं। राजस्थान से किसानों तथा कृषि विशेषज्ञों के दल पहले भी इजराइल गए हैं और हमने वहां के नवाचारों को हमारी परिस्थितियों के अनुरूप अपनाने के प्रयास भी किए हैं।

आप जानते ही हैं कि भौगोलिक दृष्टि से देश के सबसे बड़े राज्य राजस्थान में देश के उपलब्ध जल का मात्र एक प्रतिशत जल ही है। भूजल का अत्यधिक दोहन, जल की गुणवत्ता में गिरावट, मानसून पर निर्भरता, फ्लड इरीगेशन हमारे लिए चिंता का कारण है। राज्य सरकार ने अनेक योजनाओं के माध्यम से इन चिंताओं को दूर करने के साथ ही मरूस्थल की काया पलटने के प्रयास किए हैं।

आज इंदिरा गांधी नहर ने मरूधरा में खुशहाली की नई इबारत लिखी है। उत्तर-पश्चिम राजस्थान के सामाजिक और आर्थिक स्तर को खुशहाली के द्वार तक ले जाने में इस नहर की महत्ती भूमिका सभी के सामने है। फिर भी पानी की एक-एक बूंद का महत्व है। इस दिशा में हम राज्य की जल नीति के माध्यम से आमजन को जल संरक्षण तथा पानी के सदुपयोग के बारे में निरंतर जागरूक बनाने के प्रयासों में जुटे हुए हैं। कम पानी में अधिक फसल लेने के लिए स्प्रिकलर एवं ड्रिप सिंचाई को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। वर्षा जल के उपयोग तथा जल के परिशोधन के लिए योजनाएं बनाई गई हैं।

मेरे साथ राज्य का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल इजराइल जा रहा है। हम वहां जल संरक्षण, बागवानी, कम पानी में अधिक फसल सहित अन्य विषयों पर वहां के प्रतिनिधियों से विचार-विमर्श करेंगे। हम फील्ड में भ्रमण कर इन सभी क्षेत्रों में किए गए नवाचारों का अवलोकन भी करेंगे। मुझे उम्मीद है कि हमारी यह यात्रा प्रदेश के विकास में अपना योगदान देगी।

भविष्य में मेरी ईच्छा है कि सभी क्षेत्रों, वर्गो एवं समुदायों में पानी की एक-एक बूंद का महत्व समझ कर कृषि को प्रोत्साहन एवं पीने के शुद्ध जल की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु अभियान चलाया जा सके।

‘‘पानी बचाओ, बिजली बचाओ, सबको पढ़ाओ, वृक्ष लगाओ, बेटी बचाओ’’

अशोक गहलोत


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सुनहरे भविष्य की ओर बढ़ता राजस्थान
Posted on      Apr 24, 2013   

वक्त कितनी तेजी से गुजरता है। करीब साढ़े चार वर्ष पहले जब प्रदेश के संवेदनशील एवं जागरूक मतदाताओं ने एक बार फिर हमें शासन की डोर थमाई थी तब हमारे लिए शासन में रहकर जनसेवा का वह एक और सुनहरा मौका था। जन विश्वास की कसौटी पर खरा उतरने की चुनौती के साथ ही प्रदेश को प्रगति के पथ पर निरन्तर आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ हमने संवेदनशील, पारदर्शी, जवाबदेह सुशासन देने के लक्ष्य के साथ आगे कदम बढ़ाये थे।

आज मैं पहली बार अपने ब्लॉग के जरिये आपसे एक सीधा संवाद स्थापित करने की पहल कर रहा हूं। समय के साथ आ रहे बदलावों को अपनाने से सृजन के नये रास्ते भी खुलते हैं। अपनी व्यस्तता के बीच भी मेरा पूरा प्रयास रहेगा कि मैं इस ब्लॉग के जरिये अपनी बात आप तक पहुंचा सकूं।

21वीं सदी के इस दौर में सूचना क्रांति के जरिये देश और दुनिया में नित नये बदलाव आ रहे हैं। कम्प्यूटर के जरिये दुनिया एक छोटे से बक्से में समा गई है। सोशल साईट्स, ट्विटर और ब्लॉग के जरिये विचारों का जो आदान-प्रदान हो रहा है उससे ना केवल ज्ञान का विस्तार हुआ है अपितु आम आदमी पल-पल बदलते परिदृश्य से बखूबी वाकिफ भी हो रहा है।



मैं इस मौके पर युगदृष्टा, पूर्व प्रधानमंत्री स्व. श्री राजीव गांधी का पावन स्मरण करता हूं। जिन्होंने हमारे देश को 21वीं सदी की प्रतिस्पर्धा में अपने आप को साबित करने के लिए पूरी तैयारी के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया था। आज उन्हीं का वह सपना पूरा करने के लिए हमने सूचना क्रांति के जरिये शहरों से लेकर गांव-ढाणी तक विकास की एक नई धारा प्रवाहित करने का प्रयास किया है। ग्राम पंचायत एवं पंचायत समिति स्तर पर भारत निर्माण राजीव गांधी सेवा केन्द्रों के माध्यम से ग्रामीण आज जहां देश और दुनिया में घटित होने वाली घटनाओं से रूबरू हो रहे हैं, वहीं घर बैठे पानी-बिजली, टेलीफोन के बिलों को भरने के साथ ही बाजार भाव आदि की जानकारी भी ले रहे हैं।

आपको याद ही होगा कि राजस्थान देश का पहला ऐसा राज्य है जिसने अपने चुनाव घोषणा पत्र को राज्य मंत्रीमण्डल से पारित करवा उसे सरकारी दस्तावेज बनाया। जिससे विकास के हमारे संकल्प को यथार्थ के धरातल पर मूर्त रूप दे सकें। मेरा सपना एक प्रगतिशील, ऊर्जावान और नया राजस्थान बनाने का है। इसके लिए प्रदेशवासियों के सहयोग की महत्ती आवश्यकता भी है। मुझे खुशी है कि सबको साथ लेकर चलते हुए हम अपने लक्ष्य की ओर तेज गति से बढ़ रहे हैं। इसके सुखद परिणाम सामने आ रहे हैं। आज राजस्थान देश के अग्रणी राज्यों की पंक्ति में शामिल हो रहा है।

एक प्रगतिशील प्रदेश का यह संकल्प पूरा करने के लिए हमने आम आदमी को केन्द्र बिन्दु में रखकर जनकल्याणकारी योजनाओं का ताना-बाना बुना। हमारा प्रयास अंतिम छोर पर बैठे उस निर्धनतम व्यक्ति को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का है। हम एक ऐसा राजस्थान बनाना चाहते हैं जहां हर हाथ को काम मिले, खेत-खलिहान में खुशियों के भण्डार भरें, कारखाने मजदूरों के मंदिर बनें, आधारभूत संरचना का सुदृढ़ीकरण हो जिससे सतत विकास का लाभ हर वर्ग तक पहुंचे।

राज्य सरकार ने अपने बजट में जहां आम आदमी की आकांक्षाओं का समावेश किया वहीं विकास के सभी मानकों पर पूरा ध्यान दिया। शानदार वित्तीय प्रबंधन, फ्लैगशिप कार्यक्रमों, जनकल्याणकारी योजनाओं तथा जनहित में लिये गये अनेकों फैसलों से आज राजस्थान तेज गति से आगे बढ़ता जा रहा है।



हमारे भागीरथी प्रयासों के फलस्वरूप बाड़मेर में तेल रिफायनरी का मार्ग प्रशस्त हुआ। जहां देश का 20 प्रतिशत तेल निकलेगा। प्रदेश में करीब 40 हजार करोड़ रुपये का निवेश होगा तथा लाखों लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार उपलब्ध होगा। प्रदेश में खनिज सम्पदा के अथाह भण्डार, औद्योगिक विकास, समृद्धि के नये द्वार खोलेंगे। राज्य में सड़क, पानी, शिक्षा, बिजली, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सहित सभी क्षेत्रों में आशातीत सफलता अर्जित हुई है।

महिला सशक्तीकरण, युवा शक्ति को मार्गदर्शन देकर एक सुदृढ़ मानव संसाधन तैयार करने, दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों, किसानों, मजदूरों सहित हर वर्ग के लिए जो योजनाएं बनाई गई, आज उनका लाभ चहुं दिशाओं में मिल रहा है। हमने प्रदेश की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बाद भी अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। हमारे ये प्रयास, आपके सद्भाव और सहयोग के बिना पूरे नहीं हो सकते थे। आज इतना ही ……… आगे फिर किसी नये विचार के साथ आपसे इस ब्लॉग के माध्यम से मुलाकात होगी। प्रदेश के विकास में आपके रचनात्मक सुझावों का सदैव स्वागत रहेगा। इसी आशा के साथ ……..।

आइये, हम सब मिलकर एक नया राजस्थान बनायें।

अशोक गहलोत


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